पीसीओडी :-

पॉलीसिस्टिक ओवरी डिजिज ( पीसीओडी ) महिलाओं में एण्ड्रोजन (पुरुष हार्मोन) की अधिकता से होने वाला विकार हैं। पीसीओडी के लक्षणों में अनियमित माहवारी या पीरियड्स नहीं आना, दर्दभरा व लम्बा मासिक धर्म, चेहरे पर अनचाहे बाल, मुंहासे, पेल्विक दर्द, संतान प्राप्ति में कठिनाई होना है। संबंधित बीमारियों में टाइप 2 डायबिटिज, मोटापा, ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया, हृदय की समस्याएं, अवसाद की समस्या और एंडोमेट्रियल कैंसर भी शामिल हैं। मदरब्लेस फ़र्टिलिटी की आईवीएफ स्पेशलिस्ट डॉ. सुमन बताती हैं कि इस बीमारी से प्रभावित महिलाओं के दिमाग में आमतौर पर कई सवाल होते हैं जैसे कि पीसीओडी की समस्या में जल्दी गर्भवती कैसे हो सकते हैं ? पीसीओडी में आईवीएफ प्रोटोकॉल क्या है? पीसीओडी और आईवीएफ विफलता कैसे संबंधित है? क्या पीसीओडी के लिए कोई फर्टिलिटी विशेषज्ञ है? क्या पीसीओडी में आईवीएफ अंडे की गुणवत्ता को प्रभावित करता है? पीसीओडी उपचार में पहली बार में आईवीएफ सफलता की दर क्या है ?
पीसीओडी वंशानुगत होने के साथ ही पारिस्थितिक कारकों का मिलाजुला रूप है इसके अलावा वजन की समस्या, कम शारीरिक गतिविधि के साथ परिवार में इस तरह का पूर्व इतिहास शामिल है। चिकित्सा निदान निम्नलिखित पर आधारित है – ओवुलेशन नहीं होना, उच्च एण्ड्रोजन स्तर, साथ ही आवेरियन सिस्ट । मदरब्लेस फ़र्टिलिटी आईवीएफ के निःसंतानता एवं आईवीएफ विशेषज्ञ डॉ. सुमन ने बताया कि अल्ट्रासाउंड द्वारा सिस्ट का पता लगाया जा सकता है। कुछ अन्य समस्याएं जो समान संकेत और लक्षण प्रस्तुत करती हैं, उनमें एड्रिनल हाइपरप्लासिया, थायरॉयड समस्या साथ ही प्रोलैक्टिन का उच्च स्तर शामिल हैं।

पीसीओडी का कोई इलाज नहीं है। उपचार पद्धति में जीवनशैली में बदलाव जैसे वजन कम करना और व्यायाम को शामिल किया जा सकता है। मेटफोर्मिन और एंटी-एण्ड्रोजन भी मदद कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त स्थायी रूप से मुँहासे व अनचाहे बाल हटाने का उपचार लिया जा सकता है। मदरब्लेस फ़र्टिलिटी की निःसंतानता एवं आईवीएफ स्पेशलिस्ट डॉ. सुमन बताती हैं कि प्रजनन क्षमता बढ़ाने की योजना में वजन कम करना, क्लोमीफीन या मेटफॉर्मिन शामिल हैं। जिन महिलाओं को इनमें सफलता नहीं मिलती वे इन विट्रो फर्टिलाईजन (आईवीएफ) का सहारा लेती हैं।

पीसीओडी को 18 से 44 वर्ष की आयु की महिलाओं में आम हार्मोनल समस्या माना जाता है। 10 में से एक महिला को पीसीओडी के कारण निःसंतानता की समस्या हो सकती है। यदि कोई महिला अपर्याप्त ओवुलेशन के कारण निःसंतान है, तो पीसीओडी सबसे प्रमुख कारण हो सकता है। पीसीओडी के बारे में अधिक जानकारी देते हुए motherbless आईवीएफ की इनफर्टिलिटी एवं आईवीएफ विशेषज्ञ डॉ. Suman बताती हैं कि 1721 में इटली से प्राप्त पीसीओडी से जुड़ा विवरण अभी तक सबसे पुराना ज्ञात विवरण है।

पीसीओएस :-

PCOS (Polycystic Ovary Syndrome) एक हार्मोनल विकार है जो महिलाओं को प्रजनन आयु में प्रभावित करता है। इसमें, महिलाओं के शरीर में अतिरिक्त अंडों के विकास के कारण अनेक समस्याएं हो सकती हैं। PCOS से प्रभावित महिलाओं की अंडाशय में अतिरिक्त अंडे बनते हैं, जो फिर अंडाशय के बाहर की तरफ नहीं निकलते हैं।

पीसीओएस एक महिलाओं में सामान्य रूप से देखे जाने वाले एक रोग है जो उनके अंतर्नाली में गर्भाशय के पास स्थित अंडाशय (ovaries) में असामान्य रूप से अधिक अंडे (eggs) बनने के कारण होता है। यह एक सामान्य मुद्दा नहीं होता है और समस्या के रूप में समझी जाती है। यह समस्या आमतौर पर महिलाओं के जीवन के अंतिम दिनों तक रहती है।

इसके फलस्वरूप, अंडाशय के आकार में बदलाव होते हैं और इससे महिलाओं को विभिन्न समस्याएं होती हैं।

पीसीओडी/पीसीओएस के लक्षण (PCOD/PCOS Symptoms in Hindi):-


पीसीओडी-
शीर्ष आईवीएफ चिकित्सकों द्वारा बताए गये पीसीओडी के कुछ सामान्य लक्षण निम्नलिखित हैं –

  1. माहवारी संबंधी समस्याएं – पीसीओडी मुख्य रूप से ऑलिगोमेनोरिया (एक वर्ष में नौ पीरियड्स से कम आना) या एमेनोरिया (लगातार 3 या अधिक महीनों तक पीरियड नहीं आना) का कारण बनता है। हालांकि मासिक धर्म से जुड़ी अन्य समस्याएं भी हो सकती हैं।
  2. निःसंतानता – यह आम तौर पर लगातार ओव्युलेशन नहीं होने या उसकी कमी के कारण होती है।
  3. मस्कुलिनिंग हार्मोन का उच्च स्तर – हाइपरएंड्रोजेनिज्म के रूप में संदर्भित सबसे विशिष्ट संकेत मुँहासे के साथ-साथ चेहरे व शरीर पर अनचाहे बाल का विकास (पुरुष की तरह ठोड़ी या ऊपरी शरीर पर बालों का विकास) है, इसके अलावा हाइपरमेनोरिया (गंभीर और लम्बा मासिक धर्म) हो सकता है, एंड्रोजेनिक हेयर थिनिंग (बालों का पतला होना या बालों का झड़ना) या कुछ अन्य लक्षण ।
  4. मेटाबोलिक विकार – यह इंसुलिन रेजिस्टेंस से जुड़े अन्य संकेतों के साथ वजन की मौलिक समस्याओं की ओर इशारा करता है। पीसीओडी के साथ महिलाओं में सीरम इंसुलिन, इंसुलिन प्रतिरोध और होमोसिस्टीन की मात्रा भी बढ़ जाती है। पीसीओएस के साथ महिलाओं को वजन की समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

पीसीओएस-


शीर्ष आईवीएफ चिकित्सकों द्वारा बताए गये पीसीओएस के कुछ सामान्य लक्षण निम्नलिखित हैं-

1.अनियमित मासिक धर्म
2.अतिरिक्त शरीर की चर्बी (विशेष रूप से पेट के आस-पास)
3.अतिरिक्त विकसित अंडाशयों के कारण मुख्य लक्षण में से एक ये होता है कि महिलाओं की त्वचा अधिक ढीली हो जाती है
4.अतिरिक्त हिस्ट्रोन (महिलाओं के हार्मोन में एक प्रकार का हार्मोन) के कारण शरीर पर मुख्यतः चेहरे, गर्दन, छाती और घुटनों पर अतिरिक्त बाल उग जाते हैं।
5.अतिरिक्त मेलेस्ट्रोन (दूसरा प्रकार का हार्मोन) के कारण महिलाओं के शरीर में एक प्रकार का घटा दृष्टि रोग हो सकता है।
6.इंसुलिन अनुसंधान कम होने के कारण शरीर में शुगर का स्तर बढ़ सकता है।
7.उच्च रक्तचाप
8.अतिरिक्त अंधकार
9.अतिरिक्त थकान

पीसीओडी/पीसीओएस के कारण (PCOD Causes in Hindi):-

पीसीओडी-
पीसीओडी के कारण भिन्न व अनिश्चित हो सकते हैं । इसके वंशानुगत विकार होने के भी कुछ प्रमाण हैं । इस तरह के साक्ष्यों में रोगों का पारिवारिक संबंध, मोनोजायगोटिक में उच्च संगति है। आनुवांशिक केसेज में देखा गया है कि ये ऑटोसोमल डोमिनेंट बीमारी हो सकती है। कई मामलों में सिंगल जिन विकार भी पाया जाता है। एंटी-मुलेरियन हार्मोन (एएमएच) के साथ-एण्ड्रोजन का औसत डिग्री से अधिक होना भविष्य में पीसीओडी के खतरे को बढ़ाता है।

पीसीओएस-
PCOS के कारण हो सकते हैं। कुछ मुख्य कारणों में शामिल हैं:-

1.अधिक वजन: ज्यादातर महिलाओं में PCOS का सम्बन्ध अधिक वजन से होता है।
2.अस्वस्थ खानपान: अस्वस्थ खानपान और शराब पीना भी PCOS का कारण बन सकता है।
3.गंधमूल रोग: इस रोग के कारण शरीर में अधिक आंव पैदा होता है, जो महिलाओं में अतिरिक्त अंडाशय बनाने का कारण बनता है।
4.आंत्र मंडल में समस्या: आंत्र मंडल में समस्या भी PCOS का कारण बन सकती है।
5.बदलता हुआ हार्मोन स्तर: महिलाओं के हार्मोन स्तर में बदलाव भी PCOS का कारण बनता है।
6.अधिक अंधकार और थकान: अधिक अंधकार और थकान भी PCOS का कारण बन सकते हैं।

पीसीओडी/पीसीओएस किन्हे होता है? (Who Suffers From PCOD/PCOS)?

पीसीओडी-
PCOD महिलाओं को प्रभावित करता है, विशेष रूप से उन महिलाओं को जो अपने तरलता से संबंधित समस्याओं के साथ जूझ रही होती हैं। यह महिलाओं में हार्मोनल असंतुलन के कारण होता है, जो उनकी ओवरीज की गतिविधियों को प्रभावित करता है। इससे पहले जिस महिला में डायबिटीज, थायराइड, ओबेसिटी, अनियमित और असंतुलित खान-पान, तंबाकू या शराब का खपत या बुरी आदत होती है, वह इससे प्रभावित होने के जोखिम से अधिक खतरनाक हो सकती है।

अपने प्राकृतिक विकास के दौरान, महिलाओं में अंत: सेवाधारी ग्रंथियों का विकास होता है जो अंडाशय में होते हैं। इन ग्रंथियों में अंडे बनते हैं जो पालक अंडे कहलाते हैं। ये अंडे हार्मोन जैसे कि एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे विभिन्न हार्मोनों को निर्मित करते हैं। यदि ये हार्मोनों के स्तर में कोई असंतुलन होता है तो यह अंडाशय में सिस्ट बनाते हैं। इससे ओवरीज न सिर्फ समस्याएं उत्पन्न करते हैं बल्कि इससे प्रजनन क्षमता पर भी असर पड़ता है।

पीसीओएस-
यह समस्या आमतौर पर महिलाओं के अंदर हॉर्मोनल असंतुलन (Hormonal Imbalance) के कारण उत्पन्न हो जाती है।

पीसीओडी की जटिलताएं (Complications of PCOD in Hindi):-

PCOD से जुड़ी जटिलताएं निम्नलिखित हैं:

.प्रजनन क्षमता में कमी।
.इशुनद्रियता।
.बढ़ती उम्र के साथ वजन बढ़ना।
.डायबिटीज और उच्च रक्तचाप जैसी समस्याएं।
.शरीर में शुगर की मात्रा बढ़ना।
.अस्तित्वदोष या गर्भावस्था में समस्याएं।

इसलिए, PCOD के लक्षणों के साथ सावधान रहना जरूरी है और यदि आप ऐसा महसूस करते हैं, तो जल्द से जल्द एक डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। डॉक्टर आपको अपनी समस्या का मूल विकार खोजने में मदद करेंगे और आपको सही उपचार प्रदान करेंगे।

पीसीओडी से बचाव (Prevention of PCOD in Hindi):-


PCOD से बचने के लिए निम्नलिखित टिप्स अपनाएं:

.स्वस्थ और नियमित खान-पान अनुसार आहार लें।
.उच्च रसायनों के साथ भोजन से बचें।
.नियमित रूप से व्यायाम करें और वजन को संतुलित रखें।
.धूम्रपान और शराब से दूर रहें।
.स्ट्रेस को कम करें और नियमित रूप से मेडिटेशन करें।
अधिकतम स्वस्थ फायदों के लिए, इन टिप्स को नियमित रूप से अपनाएं। इसके अलावा, डॉक्टर आपको कुछ दवाइयाँ या औषधि देंगे जो आपकी समस्या को ठीक करने में मदद करेंगे।

आप अपनी सेहत को बेहतर बनाने के लिए उपरोक्त उपायों को अपनाएं और अपने डॉक्टर से नियमित रूप से जांच कराएं। यदि आपको इन लक्षणों में से कुछ अनुभव होते हैं, तो अपने डॉक्टर से संपर्क करें ताकि आपकी समस्या का मूल विकार खोजा जा सके और उचित उपचार प्रदान किया जा सके।

पीसीओडी दवाइयाँ (PCOD Medications in Hindi):-


PCOD के उपचार में डॉक्टर आमतौर पर निम्नलिखित दवाइयों का उपयोग करते हैं:

.औषधियों से असफल रहने पर, गर्भावस्था को बढ़ाने के लिए टेस्टोस्टेरोन या अन्य हार्मोन दवाओं का उपयोग कर सकते हैं।
.अनियमित मासिक धर्म को संतुलित करने के लिए ओवरलेट और अन्य मासिक धर्म नियंत्रक दवाओं का उपयोग करते हैं।
.इन्सुलिन और थायराइड हार्मोन के स्तर को संतुलित करने के लिए दवाओं का उपयोग किया जाता है।
.अंडाशय सिस्ट को ठीक करने के लिए समाधान की दवाओं का उपयोग किया जाता है।
कुछ महिलाओं के लिए योग और आहार बदलाव भी फायदेमंद हो सकते हैं। आपको अपने डॉक्टर से चिकित्सा दवाओं के लिए सलाह लेनी चाहिए और याद रखना चाहिए कि डॉक्टर की सलाह के बिना कोई भी दवा न लें।

पीसीओडी/पीसीओएस का उपचार (PCOD/PCOS Problem Treatment in Hindi):-


PCOD के उपचार के लिए निम्नलिखित उपाय किए जाते हैं:

.दवाओं का उपयोग करें। डॉक्टर असफलता के उपचार के लिए टेस्टोस्टेरोन या अन्य हार्मोन दवाओं का उपयोग कर सकते हैं। अनियमित मासिक धर्म को संतुलित करने के लिए ओवरलेट और अन्य मासिक धर्म नियंत्रक दवाओं का उपयोग करते हैं।
.अंडाशय सिस्ट को ठीक करने के लिए समाधान की दवाओं का उपयोग किया जाता है।
.स्वस्थ आहार लें। यह मुख्य रूप से शुगर, वसा, अन्य बुरे फैट और अनुपयोगी खाद्य पदार्थों का सेवन कम करने से मदद कर सकता है। स्वस्थ आहार में सब्जी, फल, पूर्ण अनाज, मखाना, ताजा दूध, अदरक और लहसुन जैसे आहार होते हैं।
.वजन कम करें। वजन कम करने से आपकी शरीर में रोगों से लड़ने के लिए इम्यून सिस्टम मजबूत हो जाता है। अतिरिक्त वजन आपकी शरीर के लिए अनुपयुक्त होता है और यह समस्याएं जैसे डायबिटीज और उच्च रक्तचाप के लिए एक कारण बन
.योग और व्यायाम करें। नियमित योग और व्यायाम करने से आपके शरीर में रक्त संचार बढ़ता है जो अंडाशय सिस्टम को स्वस्थ रखता है। साथ ही, इससे आपके शरीर का वजन भी कम होता है।
.दैनिक जीवन में स्ट्रेस से बचें। अत्यधिक स्ट्रेस आपकी शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बुरा प्रभाव डाल सकता है। स्ट्रेस कम करने के लिए आप मेडिटेशन, प्राणायाम या योग आदि तकनीकों का उपयोग कर सकते हैं।
.नियमित रूप से अपने डॉक्टर से जांच कराएं। अपने डॉक्टर से नियमित रूप से जांच करवाना चाहिए ताकि आपकी समस्या का मूल विकार खोजा जा सके और उचित उपचार प्रदान किया जा सके।

पीसीओएस-
पीसीओएस का कोई इलाज नहीं है, लेकिन इसे वजन घटाने, स्वस्थ आहार, नियमित व्यायाम और दवा के माध्यम से नियंत्रित किया जा सकता है।

वजन घटना –अधिक वजन वाली महिलाओं को डॉक्टर वजन कम करने की सलाह देता है। न्यूनतम पांच प्रतिशत वजन कम करने से भी मासिक धर्म चक्र के सामान्य होने और इस तरह से ओव्यूलेशन हो सकता है।

व्यायाम और संतुलित आहार:

-कम वसा वाले डेयरी उत्पाद, साबुत अनाज सब्जियां और फल एक संतुलित आहार का निर्माण करते हैं। संतुलित आहार के साथ व्यायाम रोग को कम करने में मदद करेगा।

धूम्रपान छोड़ें – धूम्रपान करने वाली महिलाओं में एंड्रोजेन या पुरुष सेक्स हार्मोन अधिक मात्रा में मौजूद होते हैं। ये हार्मोन पीसीओएस के लिए जिम्मेदार हैं। धूम्रपान छोड़ने से पीसीओएस के उपचार में मदद मिल सकती है|

दवा:

-पीसीओएस के लक्षणों के उपचार के लिए अक्सर दवा निर्धारित की जाती है। नियमित पीरियड सुनिश्चित करने के लिए गर्भनिरोधक गोलियां लेनी पड़ सकती हैं। शरीर पर अत्यधिक बाल आने या बालों के झड़ने को दवाओं के माध्यम से नियंत्रित किया जा सकता है।

लेप्रोस्कोपी (Laparascopy):

-पीसीओएस से पीड़ित महिलाओं में लेप्रोस्कोपी भी एक विकल्प है। गर्भधारण करने की कोशिश करने वालों में लेप्रोस्कोपिक ओवेरियन ड्रिलिंग (एलओडी) की जाती है। यह एण्ड्रोजन (पुरुष हार्मोन) पैदा करने वाले ऊतक को खत्म करने के लिए किया जाता है। यह हार्मोन के स्तर को संतुलित करने में मदद कर सकता है जिससे अंडाशय सामान्य रूप से गर्भावस्था की ओर अग्रसर हो सके। लेकिन कुछ उदाहरणों में, यह एक अल्पकालिक समाधान ही है।

आईवीएफ बेस्ट विकल्प:
मदरब्लेस फ़र्टिलिटी दिल्ली की आई वी एफ स्पेशलिस्ट (IVF specialist) डॉ. सुमन का बताती है पीसीओएस से पीड़ित अधिकांश महिलाएं सही उपचार से गर्भवती हो सकती हैं। इसमें लक्षणों और स्थिति के आधार पर क्लोमीफीन या मेटफॉर्मिन का एक कोर्स शामिल हो सकता है। इसके बाद भी पीसीओएस के साथ गर्भवती नहीं होने वाली महिलाओं के लिए आईवीएफ (In Vitro Fertilization) भी एक बेस्ट विकल्प है।

-जब दवाइयां परिणाम उत्पन्न करने में विफल होती हैं या किसी केस के लिए उपयुक्त नहीं होती हैं, तो डॉक्टर आईवीएफ या इन-विट्रो निषेचन के लिए चयन करने की सिफारिश कर सकते हैं। कुछ मामलों में, पीसीओएस का अंडों पर प्रभाव पड़ सकता है, और फिर दाता अंडे की आवश्यकता हो सकती है।

पीसीओएस के साथ स्वास्थ्य जोखिम भी:

-पीसीओएस से पीड़ित महिलाओं में बांझपन, मधुमेह, एंडोमेट्रियल कैंसर, दिल का दौरा, उच्च रक्तचाप, कोलेस्ट्रॉल का उच्च स्तर, स्लीप एपनिया, स्तन कैंसर, चिंता और अवसाद जैसी स्थितियों का खतरा अधिक होता है। एक और स्थिति है जो पीसीओएस के परिणामस्वरूप मेटाबोलिक सिंड्रोम हो सकती है जबकि पीसीओएस के साथ महिलाओं में हृदय संबंधी जोखिम दोगुना है।

जो महिलाये पीसीओएस से प्रभावित होती हैं उनमे आई वी एफ तकनीक कारगर साबित हो रही है |

पीसीओडी/पीसीओएस में आहार (Diet in PCOD/PCOS):-


PCOD में आहार के लिए निम्नलिखित उपाय उपयोगी हो सकते हैं:

.विटामिन D से भरपूर आहार लें, क्योंकि यह PCOD में संभवतः कमी होता है।
.स्वस्थ वस्तुओं का सेवन करें जैसे कि पौष्टिक फल, सब्जियां, अखरोट और मक्खन।
.विशेष रूप से उबले हुए अंडे, सोयाबीन, चना, मूंग दाल और दूध प्रोटीन का अच्छा स्रोत होते हैं।
.जंक फूड से दूर रहें। जंक फूड में बहुत अधिक मात्रा में तला या बिना तला हुआ तेल होता है, जो आपकी समस्या को बढ़ाता है।
.आयुर्वेदिक दवाओं का सेवन करें, जैसे कि शतावरी, अश्वगंधा और गुग्गुल। आयुर्वेदिक दवाओं का सेवन करने से स्वास्थ्य में सुधार होता है और PCOD से निपटने में मदद मिलती है।
शायद आपको यह जानना चाहिए कि PCOD में आहार केवल एक अंश होता है और यह केवल उपचार का एक हिस्सा होता है। PCOD के लिए सही उपचार और लाइफस्टाइल बदलाव भी जरूरी होते हैं।

पीसीओएस-
अगर आपको पीसीओ की समस्या है, तो आपको संतुलित आहार का पालन करना चाहिए। अधिकतम सुझावों में, खाद्य जैसे कि ऊबला हुआ सब्जी, फल, शाकाहारी भोजन और अनाज शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा, आपको कुछ अन्य आहार अनुसंधान भी करना चाहिए जो आपकी समस्या को सुधार सकते हते हैं। इन आहारों में मूली, टमाटर, ब्रोकली, फल, आटे का उत्पाद, सोया उत्पाद, सफेद मांस और मछली शामिल हो सकते हैं। आपको इन आहारों का उपयोग करने के बारे में अपने चिकित्सक से परामर्श करना चाहिए।

.संतुलित भोजन: संतुलित भोजन खाना आपके शरीर के लिए बहुत जरूरी होता है। आपको अपने आहार में फल, सब्जियां, अनाज, प्रोटीन, दूध, दही और दूसरे डेयरी उत्पादों को शामिल करना चाहिए।
.कार्बोहाइड्रेट्स: आपको अपने आहार में कम कार्बोहाइड्रेट शामिल करने की आवश्यकता होगी। इसके बजाय, आप अनाज जैसे गेहूं, बाजरा, जौ और चावल का सेवन कर सकते हैं।
.वसा: आपको वसा कम करने की आवश्यकता होगी। इसके बजाय, आप बैकेड और ब्राउन रोटी का सेवन कर सकते हैं। आपको अपनी डाइट में फल, सब्जियां, मखाना, फलीदार विशेष आहार जैसे लौंग, हींग और दही शामिल!

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